परेशानियाँ कभी ख़त्म नहीं होती एक बीत जाती तो दूजी शुरू होती उम्र बीत जाती है इनको सुलझाने में पर ये कम्बख्त भी बेहया होती हैं पाँव पसारने में आती हैं ये ज़िन्दगी में नाम बदल-बदल कर और हम ग़फलत में रहते हैं एक को ख़तम कर कर । एक वक़्त के बाद हम सब हँसते हैं इन परेशानियों पर जैसे यही तो हम चाहते हों ज़िन्दगी भर  ये तो वो सिलसिला है जो कभी ख़त्म नही होता कम्बख्त इंसान को चैन से मरना भी नसीब नही होता ।
मेरी एक कोशिश...........