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परेशानियाँ........

परेशानियाँ कभी ख़त्म नहीं होती
एक बीत जाती तो दूजी शुरू होती
उम्र बीत जाती है इनको सुलझाने में
पर ये कम्बख्त भी बेहया होती हैं पाँव पसारने में
आती हैं ये ज़िन्दगी में नाम बदल-बदल कर
और हम ग़फलत में रहते हैं एक को ख़तम कर कर ।
एक वक़्त के बाद हम सब हँसते हैं इन परेशानियों पर
जैसे यही तो हम चाहते हों ज़िन्दगी भर
                                                     ये तो वो सिलसिला है जो कभी ख़त्म नही होता
                                                      कम्बख्त इंसान को चैन से मरना भी नसीब नही होता ।

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मैं कुछ कहना चाहता हूँ ..................

मैं कुछ  कहना  चाहता  हूँ . दिल  के  अरमानो  को  शब्दों  में  पिरोना  चाहता   हूँ . हाँ , कुछ  आज  कहना  चाहता  हूँ  बस  थोडा  सा  जीना  चाहता  हूँ | है  मालूम  मुझे  कैसी  उल्फत  में  है  वो थोडा  परेशान  थोड़ी  दहशत  में  है  वो, उसकी  दहशत  और  परेशानियों  को  मोलना  चाहता  हूँ उसे  कुछ  आराम  थोडा  सुकून  देना  चाहता  हूँ | मैंने  देखा  है  कश्तियों  को  समन्दर  में  खोते  हुए बस  यूँही  पल  भर  में  गुम  होते  हुए ना डूबने  दूंगा  तुझे  ये  वादा  है  मेरा कर  मुझ  पे  यकीं ,संग  जीने  का  इरादा  है  मेरा . उसको  एक  बार  बाँहों  में  भरना  चाहता  हूँ उ...