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मैं कुछ कहना चाहता हूँ ..................

मैं कुछ  कहना  चाहता  हूँ .
दिल  के  अरमानो  को  शब्दों  में  पिरोना  चाहता   हूँ .
हाँ ,कुछ  आज  कहना  चाहता  हूँ 
बस  थोडा  सा  जीना  चाहता  हूँ |

है  मालूम  मुझे  कैसी  उल्फत  में  है  वो
थोडा  परेशान  थोड़ी  दहशत  में  है  वो,
उसकी  दहशत  और  परेशानियों  को  मोलना  चाहता  हूँ
उसे  कुछ  आराम  थोडा  सुकून  देना  चाहता  हूँ |

मैंने  देखा  है  कश्तियों  को  समन्दर  में  खोते  हुए
बस  यूँही  पल  भर  में  गुम  होते  हुए
ना डूबने  दूंगा  तुझे  ये  वादा  है  मेरा
कर  मुझ  पे  यकीं ,संग  जीने  का  इरादा  है  मेरा .
उसको  एक  बार  बाँहों  में  भरना  चाहता  हूँ
उसके  माथे  को  चूम  ये  कहना  चाहता  हूँ

की  अब  बस  ,कहना  नहीं  ......कुछ  करना  चाहता  हूँ  मैं .............

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