आज़ाद हम आज़ाद तुम
आज़ाद आज हमारी हर-दम
एहसास नही हमको कुछ कि क्या होता आज हमारा जीवन
मातृभूमि पर जान लुटाते वो वीर हिचक जाते जो पल भर ,
चलो आज कुछ क़र्ज़ उतारें
उन वीरो को शीश नमाएं
जिसने बाटी हमको ये खुशियाँ
जिनका प्रेम था निर्मल निश्छल,
ये नमन नही किसी एक को हो
ना गाँधी ना आज़ाद को है
ये नमन तो हर उस शख्श को है
जिसने बख्शा हमको ये जीवन,

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